कन्या भ्रूण हत्या हमारे समाज की एक गहरी जड़ें जमाई हुई समस्या है। यह न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह मानवता के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।
कन्या भ्रूण हत्या भारत की एक बहुत गंभीर सामाजिक समस्या है। विद्वानों का मानना है कि 1990 के दशक से अब तक करीब 1 करोड़ से ज़्यादा कन्या भ्रूणों का अवैध गर्भपात किया गया है। हर साल लगभग 5 लाख से अधिक लड़कियाँ सिर्फ इसलिए जन्म नहीं ले पातीं क्योंकि वे कन्या होती हैं। भारत में हर साल करीब 1 लाख से अधिक गर्भपात सिर्फ इसलिए होते हैं क्योंकि भ्रूण लड़की होती है।
डेरा सच्चा सौदा और संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान जी का योगदान
संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान जी ने समाज में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” की भावना को वास्तविक रूप दिया। आपकी प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा, सिरसा (हरियाणा) ने भ्रूण हत्या रोकने के लिए एक विशेष मुहिम शुरू की।
इस अभियान के तहत: भ्रूण हत्या और लिंग-आधारित भेदभाव जैसी कुप्रथाओं को रोकने के उद्देश्य से, बाबा राम रहीम ने उन कन्याओं को, जिन्हें गर्भ में ही मार दिया जाता है या जिनके माता-पिता उन्हें छोड़ देते हैं, अपनी दत्तक पुत्रियों के रूप में अपनाया है। उन्होंने लाखों अनुयायियों को अपनी अजन्मी बेटियों की हत्या न करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया है।
- लोगों को बताया गया कि लड़की और लड़का दोनों ईश्वर की समान रचना हैं।
- हजारों परिवारों ने बेटी पैदा होने पर खुशियाँ मनाने की परंपरा शुरू की।
- डेरा सच्चा सौदा ने “शाही बेटियाँ” जैसे कार्यक्रमों में यह संदेश फैलाया कि बेटियाँ घर की शान हैं, बोझ नहीं।
- संस्था ने ऐसे परिवारों को सम्मानित भी किया जिन्होंने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ आवाज उठाई और अपनी बेटियों को गर्व से पाला।
इन प्रयासों के कारण समाज में सोच बदलने लगी, और बहुत से लोग अब बेटियों को गर्व का प्रतीक मानने लगे हैं।
कन्या भ्रूण हत्या के कारण

भारत के कई हिस्सों में लड़कों को बेटियों से अधिक महत्व दिया जाता है। लोग मानते हैं कि बेटा बड़ा होकर कमाएगा, परिवार का नाम आगे बढ़ाएगा और बुढ़ापे में माता-पिता की देखभाल करेगा। वहीं, बेटी को “दायित्व” समझा जाता है क्योंकि शादी के बाद वह दूसरे घर चली जाती है और दहेज जैसी बुरी प्रथाएँ परिवार पर बोझ बढ़ाती हैं।
गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण भी परिवार बेटियों की परवरिश में लापरवाही करते हैं। कई बार बेटों को अच्छा खाना, शिक्षा और इलाज दिया जाता है, जबकि बेटियों को नज़रअंदाज़ किया जाता है। इससे समाज में लिंग अनुपात असंतुलित हो जाता है।
शिक्षा और कन्या भ्रूण हत्या के प्रति जागरूकता की ज़रूरत
कन्या भ्रूण हत्या केवल कानून से नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने से ही खत्म हो सकती है। लड़कियों को समान शिक्षा, रोजगार और अवसर मिलें — यही इसका स्थायी समाधान है। जब बेटियाँ आत्मनिर्भर बनेंगी, तो वे परिवार और समाज दोनों के लिए शक्ति बनेंगी।
संत डॉ. MSG जी ने हमेशा कहा है — “बेटी केवल परिवार की नहीं, देश की शान होती है। उसे सम्मान दो, अवसर दो, और उसका जीवन संवारो।”
कानूनी और सामाजिक उपाय
सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं। अल्ट्रासाउंड से बच्चे का लिंग बताना अपराध है। लिंग चयन करने वाले डॉक्टरों और परिवारों पर सज़ा का प्रावधान है। अल्ट्रासाउंड मशीनों का पंजीकरण और निगरानी अनिवार्य की गई है।
इसके अलावा, कई राज्य सरकारें बेटियों के जन्म पर प्रोत्साहन राशि देती हैं और मुखबिरों के लिए इनाम योजनाएँ चलाती हैं ताकि भ्रूण हत्या की सूचना समय पर दी जा सके। महिलाओं की शिक्षा, स्वावलंबन और अधिकारों को बढ़ावा देना भी इस दिशा में बड़ा कदम है।
नया दृष्टिकोण: समाज में बदलती सोच

आज के समय में यह देखकर संतोष होता है कि समाज में धीरे-धीरे परिवर्तन आ रहा है। शिक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के कारण अब लोग समझने लगे हैं कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। खेल, विज्ञान, राजनीति, सेना और व्यवसाय में महिलाएँ अपनी प्रतिभा से देश का नाम रोशन कर रही हैं।
डेरा सच्चा सौदा की प्रेरणा से कई ग्रामीण इलाकों में भी लोग अब बेटियों के जन्म पर जश्न मनाते हैं। स्कूलों में “बेटी है तो भविष्य है” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इससे समाज में सकारात्मक बदलाव का माहौल बना है।
FAQs
प्रश्न 1: कन्या भ्रूण हत्या क्या है?
उत्तर: जब गर्भ में ही लड़की के भ्रूण को मार दिया जाता है, तो इसे कन्या भ्रूण हत्या कहा जाता है।
प्रश्न 2: भारत में भ्रूण हत्या क्यों होती है?
उत्तर: सामाजिक मान्यताओं, दहेज प्रथा और लिंग भेदभाव के कारण यह अपराध होता है। भारत में यह गैरकानूनी है और इसके लिए सख्त सज़ा का प्रावधान है।
प्रश्न 3: बाबा राम रहीम जी ने इस दिशा में क्या कदम उठाए?
उत्तर: उन्होंने बेटियों को गोद लेकर समाज को प्रेरित किया और भ्रूण हत्या रोकने के अभियान चलाए।
प्रश्न 4: डेरा सच्चा सौदा का इसमें क्या योगदान है?
उत्तर: संस्था ने समाज में बेटियों के सम्मान और शिक्षा को बढ़ावा देने वाले अनेक अभियान चलाए हैं।
प्रश्न 5: बेटियों के जन्म पर सरकार क्या प्रोत्साहन देती है?
उत्तर: कई योजनाएँ जैसे ‘लाड़ली योजना’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ बेटियों के लिए आर्थिक सहायता देती हैं।
निष्कर्ष
यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता के विरुद्ध पाप है। इसे रोकने के लिए कानून के साथ-साथ समाज की सोच और संस्कार बदलना ज़रूरी है। संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान जी के प्रयासों ने यह साबित किया है कि अगर सही दिशा में सोच और जागरूकता फैलाई जाए, तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
बेटियाँ बोझ नहीं — वे घर की रौनक, देश की शक्ति और भगवान का सबसे सुंदर उपहार हैं। हमें मिलकर यह संकल्प लेना चाहिए कि अब कोई बेटी गर्भ में न मारी जाए।